Friday, November 25, 2022

मैनपुरी में डिंपल को उतारने से पहले अखिलेश ने सजाई फील्डिंग, 2019 के नतीजों से हैं सतर्क!

गुरुवार को डिंपल के टिकट का ऐलान हुआ है और उससे पहले बुधवार को पूर्व मंत्री आलोक शाक्य को मैनपुरी का जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इस तरह सपा ने मैनपुरी में फील्डिंग सजा ली है ताकि जीत में सेंध न लगे।

मुलायम सिंह यादव की सीट रही मैनपुरी से समाजवादी पार्टी ने लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव को मैदान में उतारा है। इस सीट पर यादव परिवार से ही धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव जैसे नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन अखिलेश ने पत्नी डिंपल पर भरोसा जताया है। इस तरह नेताजी की खास विरासत को अखिलेश यादव अपने परिवार में ही बनाए रखेंगे। यही नहीं डिंपल को जीत दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी ने पूरी फील्डिंग भी सजा ली है। गुरुवार को डिंपल के टिकट का ऐलान हुआ है और उससे पहले बुधवार को पूर्व मंत्री आलोक शाक्य को मैनपुरी का जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

मैनपुरी जिले में कुल 17.4 लाख मतदाता हैं और इनमें से 7 लाख की संख्या यादव वोटरों की है। दूसरे नंबर शाक्य मतदाता हैं, जिनके करीब 3 लाख वोटर हैं। इस तरह अखिलेश यादव ने यादव बिरादरी के अलावा शाक्यों को भी साधने की कोशिश की है ताकि चुनावी जीत में सेंध की कोई आशंका न रहे। इससे पहले भाजपा ने 2019 के आम चुनाव में मुलायम सिंह यादव के मुकाबले प्रेम सिंह शाक्य को उतारा था, जिन्हें 4 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। वहीं मुलायम सिंह को 5 लाख ज्यादा मत मिले थे और जीत का अंतर 1 लाख से भी कम था। माना जाता है कि भाजपा कैंडिडेट को शाक्य वोटरों के अच्छे खासे वोट मिले थे।मुलायम को भाजपा ने 2019 में दी थी कड़ी टक्कर
ऐसे में इस बार किसी भी तरह से वोट न बंट पाए, इसकी कोशिश अखिलेश यादव ने पहले से ही शुरू कर दी है। 2019 के आंकड़े को देखते हुए ही कहा जा रहा था कि मुलायम सिंह यादव के गढ़ को बनाए रखना इतना आसान भी नहीं है। हालांकि इस बार सपा को सहानुभूति का वोट भी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा शाक्य जिलाध्यक्ष के जरिए शाक्यों के बीच भी पैठ की आस है। भाजपा इस साल की शुरुआत में ही सपा की गढ़ कही जाने वाली रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। इसलिए सपा के लिए मैनपुरी जीतना अब प्रतिष्ठा का भी सवाल है। 

कन्नौज में ब्रजेश पाठक से हार गई थीं डिंपल यादव

गौरतलब है कि डिंपल यादव ने पहली बार 2012 में संसद का रुख किया था। उन्होंने लोकसभा उपचुनाव में कन्नौज सीट से जीत हासिल की थी, जिसे सीएम बनने के बाद अखिलेश यादव ने छोड़ा था। इसके बाद 2014 के आम चुनाव में भी डिंपल को जीत मिली थी, लेकिन 2019 में वह भाजपा के ब्रजेश पाठक हाथों हार गई थीं। अब यदि डिंपल यादव को मैनपुरी में विजय मिलती है तो उनकी लोकसभा में तीसरी पारी होगी।

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