Wednesday, December 7, 2022

दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी होगी खत्म, तीसरी लाइन पर परिचालन शुरू

दिल्ली से हावड़ा तक ट्रेनों की लेटटलीफी जल्द खत्म होने की उम्मीद है। हावड़ा से राजस्थान तक बिछाई जा रही रेलवे की तीसरी रेल पटरी लगभग 90 फीसदी बनकर तैयार हो गई है। कुछ दूरी में परिचालन शुरू हो गया है।

दिल्ली से हावड़ा तक ट्रेनों की लेटटलीफी जल्द खत्म होने की उम्मीद है। हावड़ा से राजस्थान तक बिछाई जा रही रेलवे की तीसरी रेल पटरी लगभग 90 फीसदी बनकर तैयार हो गई है। चुनार से उंचाडीह रेलवे स्टेशन के बीच मालगाड़ियों का परिचालन भी शुरू हो गया है। रेलवे के परिचालन विभाग के अफसरों के मुताबिक परीक्षण के तौर पर प्रतिदिन चार से पांच मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है। इससे हाबड़ा-दिल्ली रूट की पुरानी रेल पटरी पर अब ट्रेनों के परिचालन का दबाव कम हो जाएगा। 

हाबड़ा-दिल्ली रूट पर ट्रेनों के दबाव को कम करने के लिए रेलवे की तरफ से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। इस रेलमार्ग के समानांतर तीसरी लाइन का निर्माण कराया जा रहा है। रेलवे का मानना है कि इससे पुरानी लाइन पर ट्रेनों का दबाव कम हो जाएगा। मालगाड़ियों के परिचालन के लिए अलग रूट होगा। एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन भी समय से हो सकेगा। इसी को ध्यान में रखकर बीते छह वर्षों से तीसरी लाइन का निर्माण कराया जा रहा है।

रेल पटरी का 90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के मुताबिक किसी-किसी स्थान पर विद्युतीकरण का कार्य छूटा हुआ है। उसे भी डीएफसी पूरा कराने में जुटी हुई है। वहीं चुनार से उंचडीह के बीच तीसरी रेल पटरी पर ट्रेनों का परिचालन भी शुरू करा दिया गया है। स्टेशन अधीक्षक रविंद्र कुमार के मुताबिक प्रतिदिन चार से पांच मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है।

डीएफसी ट्रैक बना वरदान, 1.25 लाख यात्रियों को राहत

दिल्ली-हावड़ा रूट पर कानपुर से प्रयागराज के बीच ट्रेन संचालन रविवार सुबह 10.25 से सोमवार सुबह 7.24 बजे तक बंद रहा। इस वजह से न्यू सुजातपुर से न्यू रूमा डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से रेलवे प्रशासन ने 48 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कराया। इस वजह से ये ट्रेनें एक से दो घंटे से अधिक लेट नहीं हुईं। ट्रेनों में सवार लगभग 1.25 लाख यात्री दिवाली पर समय से घर पहुंच गए। अगर इतनी संख्या में ट्रेनें दूसरे रूटों से चलाई जातीं तो घंटों लेट होती और दूसरी रूटों की नियमित ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ता।

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