Friday, December 2, 2022

अयोध्या में दिवाली की तैयारियां पूरी, भगवान राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के प्रसंगों पर निकलेंगी झांकियां

अयोध्या में दिवाली की तैयारियां पूरी हो गई है। दीपोत्सव के दिन साकेत महाविद्यालय से नया घाट चौराहे तक शोभायात्रा निकलेगी। इस दौरान भगवान राम के जन्म समेत उनके जीवन से जुड़ी 16 झांकियां निकलेगी।

राज्य सरकार ने दीपोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। दीपोत्सव के दिन साकेत महाविद्यालय से नया घाट चौराहे तक शोभायात्रा निकलेगी जिसमें 16 झाकियां होंगी। इनमें राम जन्मभूमि मॉडल, काशी कॉरिडोर, विजन 2047, 1090 और भगवान राम के जन्मकाल  से लेकर राज्याभिषेक तक की यात्रा रहेगी।

रामायण कालीन शिक्षा पर आधारित झांकियों को दिखाने के लिए संबंधित कलाकार 16 रथों पर सवार होंगे। ये अपनी कला के जरिए रामायण कालीन दृश्यों को जीवंत करेंगे। इसके अलावा पूरे देश से आए कलाकार रथ के आसपास नृत्य करते चलेंगे।

11 झांकियां सूचना विभाग की होगी

इस बार 11 झांकियां सूचना विभाग की ओर से निकलेंगी। वहीं पांच झांकियां डिजिटल होंगी। डिजिटल झांकी पर्यटन विभाग निकालेगा जो खुले रथ पर होंगी। इनमें भी रामायण कालीन दृश्यों के अलावा राम मंदिर का मॉडल और 2047 अयोध्या के विकास का मॉडल पेश किया जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी राम तीरथ ने बताया कि इस बार दीपोत्सव में कई राज्य के कलाकारों को शोभायात्रा में सहभागिता करने का अवसर मिलेगा। शोभायात्रा साकेत महाविद्यालय से सुबह 9 बजे निकलेगी, जो दोपहर 1 बजे दीपोत्सव स्थल पहुंचेगी।

बिरहा गायन से लेकर धोबिया नृत्य तक

यूपी व कई राज्यों के कलाकार प्रस्तुति देंगे। स्थानीय कलाकार विजय यादव व मुकेश कुमार फरुआही नृत्य करेंगे तो आजमगढ़ के मुन्नालाल यादव धोबिया नृत्य पर प्रस्तुति देंगे। गाजीपुर के कलाकार पारसनाथ यादव अयोध्या के मंच पर लोकगायन की प्रस्तुति देंगे। बिरहा सुनने का अवसर भी अयोध्यावासियों को मिलेगा। भदोही के शेषमणि सरोज अपने बिरहा से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। झांसी के रणसिंघा विधा की महक प्रशांत आर्या बिखेरेंगे।  

हरियाणा के महावीर सिंह गुड्डू वहां के लोकगीत और नृत्य से परिचित कराएंगे तो झारखंड के सृष्टि धर महतो छाऊ नृत्य, मुंबई की प्रीत प्रेरणा के भजन, नई दिल्ली की कथक कलाकार अरूपा लहरी समेत गुजरात सरकार के संस्कृति मंत्रालय की तरफ से भी लोकनृत्य का आयोजन होगा।

जिलों के कलाकारों को भी यहां मंच मिलेगा। लखनऊ, अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, भदोही, गोंडा, सोनभद्र, गाजीपुर, बाराबंकी, अमेठी, अकबरपुर, सुल्तानपुर, झांसी, बांदा समेत कई भाषाओं व शैलियों से जुड़ी संस्कृति की झलक भी दिखेगी।

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