Monday, November 28, 2022

आईआईटी बीएचयूः छह साल बाद पूरी हुई अनोखी शर्त, टॉपर छात्रा को मिला मेडल

आईआईटी बीएचयू के 11वें दीक्षांत समारोह को टॉपर छात्राओं ने खास बनाया। ऐसा पहली बार था कि यहां के तीन प्रमुख मेडल छात्राओं ने जीते। इस बार छह साल से इंतजार कर रहे एक और मेडल का खाता भी खुला।

आईआईटी बीएचयू के 11वें दीक्षांत समारोह को टॉपर छात्राओं ने खास बनाया। ऐसा पहली बार था कि यहां के तीन प्रमुख मेडल छात्राओं ने जीते। इस बार छह साल से इंतजार कर रहे एक और मेडल का खाता भी खुला। इस मेडल की शुरुआत वर्ष-2016 में हुई थी मगर शर्त थी कि यह किसी छात्रा को ही दिया जाएगा। बीटेक की छात्रा श्लोका नेगी ने पहली बार यह मेडल जीता। 

बीएचयू के पुराछात्र और बनारस के प्रतिष्ठित साड़ी व्यवसायी पुरुषोत्तम केसवानी ने वर्ष-2016 में इस गोल्ड मेडल की शुरुआत के लिए धनराशि दी थी। बीएचयू की कॉमर्स फैकेल्टी से 1975 में पासआउट श्री केसवानी की इच्छा पर उनकी मां के नाम पर इस मेडल का नाम ‘स्व. सुंदरी देवी स्वर्ण पदक’ रखा गया।

तय किया गया कि 8.50 से ज्यादा सीपीआई और फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में टॉप करने वाली छात्रा को यह दिया जाएगा। मगर इस मेडल के लिए छह साल तक इंतजार करना पड़ा। अंतत: 11वें दीक्षांत समारोह में यह मौका आया जब छात्रा ने टॉप किया और यह मेडल जीता। छात्रा श्लोका नेगी ने इस बार कुल 11 मेडल और दो अवार्ड जीते हैं।

पुरुषोत्तम केसवानी ने बताया कि इस मेडल को जीतने वाली छात्रा को साड़ी भी भेंट करने की इच्छा थी जिसे पहनकर वह पदक ग्रहण करती। मगर ऐसा न हो पाया। दीक्षांत समारोह का आमंत्रण उनके पास पहुंचने में देर हो गई। समारोह के दिन ही आमंत्रण मिला इसलिए वह शामिल नहीं हो सके। उन्हें उम्मीद है कि अगले दीक्षांत समारोह में फिर कोई छात्रा टॉपर बने और उनकी यह इच्छा भी पूरी हो।

और भी हैं खास पुरस्कार

श्लोका नेगी को मिले दो पुरस्कार भी बेहद खास और पुराने हैं। इनमें एक डॉ. एनी बेसेंट पुरस्कार है। जिसमें उनकी लिखी किताबों के साथ ही पुरस्कार विजेता छात्र या छात्रा को ‘श्रीमद्भागवत गीता’ की एक प्रति दी जाती है। दूसरा पुरस्कार स्व. प्रो. जीपी श्रीवास्तव के नाम पर दिया जाता है। इसमें विजेता को 200 रुपये की किताबें पुरस्कार स्वरूप दी जाती हैं।

मेडल विजेता छात्रा श्लोका नेगी ने कहा कि मुझे इस मेडल के पीछे की कहानी की जानकारी नहीं थी। अब यह और भी खास हो गया। मैंने अलग और कठिन रास्ता चुना, विश्वास और कड़ी मेहनत के दम पर इस सफर को पूरा किया। मेरी उपलब्धियों का श्रेय मेरे माता-पिता और टीचर्स को है। 

आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन के अनुसार छह साल में पहली बार यह पदक मिलना और इसके पीछे का कारण सुखद है। पदक शुरू करने वालों की इच्छा के अनुसार ही इसे तब दिया गया जब छात्रा टॉपर बनी। इस साल आईआईटी बीएचयू के दोनों सबसे प्रतिष्ठित पदक छात्राओं ने ही जीते। इनमें एक राष्ट्रपति और दूसरा निदेशक पदक है।

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