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नीतीश का BJP पर निशाना, कहा- उनकी प्रधानमंत्री बनने की कोई महात्वाकांक्षा नहीं

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को अपने पूर्व सहयोगी भाजपा पर प्रधानमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षाओं की अटकलों को लेकर निशाना साधा और कहा कि वह ‘कुछ भी’ नहीं बनना चाहते हैं.

मुख्यमंत्री का यह बयान विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र को संबोधित करते हुए आया. कुमार ने कहा, ‘जो लोग कहते हैं कि मैंने गठबंधन से इसलिए हाथ खींच लिए हैं क्योंकि मैं कुछ बनना चाहता हूं, मैं कुछ नहीं बनना चाहता.’

मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व पार्टी सदस्य आरसीपी सिंह पर भी कटाक्ष किया, जिन्होंने हाल ही में जद(यू) से इस्तीफा दे दिया था और कहा था कि उन्होंने सिंह को जमीन से टॉप पर उठने में मदद की.

उन्होंने कहा, ‘मैं 2020 के चुनाव में (सीएम बनने के लिए) तैयार नहीं था. मैंने कहा था कि आपने (भाजपा) अधिक सीटें जीती हैं, सीएम आपकी पार्टी से होना चाहिए. मुझ पर सीएम बनने के लिए बहुत दबाव डाला गया, मैं अंत में तैयार हो गया. लेकिन जिसे मैंने अपनी पार्टी में जमीन से ऊपर तक उठाया. मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष था, लेकिन मैंने उन्हें उस पद पर नियुक्त किया. मेरी पार्टी के सदस्य मुझसे कहते थे कि कुछ गलत हो रहा है. लेकिन मैंने नहीं सुना.’

कुमार ने आगे आरोप लगाया कि प्रेस और सोशल मीडिया पर केंद्र का नियंत्रण है.

उन्होंने कहा, ‘2017 में, जब मैंने पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा देने की मांग की, तो किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. अब आप (केंद्र सरकार) अपने काम का विज्ञापन करने के लिए ऐसा ही करेंगे. सोशल मीडिया और प्रेस पर उनका नियंत्रण है. हर कोई केवल केंद्र के काम पर चर्चा कर रहा है.’

इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी के विजय कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली ‘महागठबंधन’ गठबंधन सरकार के बहुमत को साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट से पहले आज बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.

जद(यू) के नरेंद्र नारायण यादव, जिनके नाम की सिफारिश सिन्हा ने की थी, अब फ्लोर टेस्ट की अध्यक्षता करेंगे. सिन्हा का इस्तीफा सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों द्वारा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद आया है.

सिन्हा ने पहले कहा था कि विधानसभा सचिवालय में प्राप्त प्रस्ताव के लिए नोटिस अस्पष्ट था और नियमों और कायदों का पालन नहीं करता था.

सिन्हा ने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपका अविश्वास प्रस्ताव अस्पष्ट है. नौ में से आठ पत्र मिले थे, जो नियम के मुताबिक नहीं थे.’

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