Tuesday, November 29, 2022

राममंदिर निर्माणः पूरब से मिलेगा प्रवेश, उत्तर-पूर्व में ओपेन टनल से बाहर आएंगे श्रद्धालु

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग उत्तर भारत की प्राचीन नागर शैली की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करने के लिए किया जा रहा है। पत्थरों की नक्काशी भी मशीनों से हो रही है।

दीपावली के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अवलोकन के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से मीडिया को भी राम मंदिर परिसर में आमंत्रित कर निर्माण की प्रगति से रूबरू कराया गया। इस ऐतिहासिक मंदिर में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग उत्तर भारत की प्राचीन नागर शैली की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करने के लिए किया जा रहा है। यहां तक कि पत्थरों की नक्काशी भी आधुनिक मशीनों से हो रही है। खास बात यह है कि मंदिर में आने और वापस जाने का रास्ता अलग होगा। पूरब की दिशा से दर्शनार्थी मंदिर में आएंगे और उत्तर पूर्व दिशा में बने खुले सुरंग की तरह बने रास्ते से बाहर आएंगे।

राम मंदिर निर्माण की कार्यदायी एजेंसी एलएण्डटी की ओर से निर्धारित डिजाइन से कराए जा रहे मंदिर निर्माण का पर्यवेक्षण कर रही टाटा कंसल्टेंसी के साथ सहयोगी की भूमिका राष्ट्रीय स्वयं सेवक के भी इंजीनियर निभा रहे है। इन्हीं में प्रमुख इं. गिरीश सहस्त्र भोजनी बताते हैं कि रामलला के दर्शनार्थी पूरब के रास्ते से आकर सिंहद्वार से मंदिर में प्रवेश करेंगे लेकिन जब वह बाहर जाएंगे तो उनका रास्ता उत्तर-पूर्व दिशा में खुलेगा। यहां से बनी सीढ़ियों व रैम्प से दर्शनार्थी श्रद्धालु नीचे उतरेंगे और खुले सुरंग से होकर बाहर निकलेंगे। इस योजना के  पीछे यह सोच है कि आने और जाने भीड़ आपस में न टकराए। मालूम हो कि इसी खुले टनल के ऊपर से दर्शनार्थियों का प्रवेश होगा।

रिटेनिंग वाल से तीन मीटर अंदर व सुपर स्ट्रक्चर से 25 मीटर दूर बनेगा परकोटा

राम मंदिर में परकोटे की बड़ी अहम भूमिका होगी। यह परकोटा बहुउद्देश्यीय बनाया जाएगा। यह सतह से साढ़े चार मीटर ऊपर व राम मंदिर के गर्भगृह से 1.9 मीटर नीचे होगा। मिट्टी की भराई कर बनाए जाने वाले परकोटे की चौड़ाई 14 फिट होगी जो कि प्रदक्षिणा पथ के रुप में भी उपयोग होगा। यह प्रदक्षिणा पथ से सुपर स्ट्रक्चर के बाहरी दीवारों पर हुई नक्काशी भी देखी जा सकेगी।

संघ के इंजीनियर जगदीश आफले बताते हैं कि वर्गाकार परकोटे की लंबाई करीब पांच सौ मीटर है। फिर भी इस प्रदक्षिणा पथ की परिधि करीब आठ सौ मीटर है। इसका निर्माण रिटेनिंग वाल से तीन मीटर अंदर व सुपर स्ट्रक्चर से 25 मीटर दूर कराया जाना प्रस्तावित है।

करीब साढ़े मीटर ऊंचे मंदिर पर चढ़ने के लिए रैम्प व सीढ़ियां दोनों होंगी

टाटा कंसल्टेंसी के मुख्य परियोजना निदेशक बिनोद कुमार शुक्ल बताते हैं कि राम मंदिर की ऊंचाई सतह से करीब साढ़े छह मीटर है। उन्होंने बताया कि सिंहद्वार से रामलला तक आने के लिए श्रद्धालुओं को 26 सीढ़ियां चढ़नी पड़ेंगी क्योंकि दो सीढ़ियों के मध्य दस इंच का अंतर निर्धारित है। वह यह भी बताते  हैं कि ऊंचे मंदिर पर आने व जाने के लिए सीढ़ियां व रैम्प दोनों ही बनाए जाएंगे।

इनका निर्माण पूरब के अलावा उत्तर-दक्षिण में भी किया जाएगा और यह तीनों तरह जुडवां होगी जिससे कि आवागमन निर्बाध रूप से चलता रहे। उन्होंने बताया कि पत्थरों के इस मंदिर में विशेष प्रकार के ब्रिक्स (ईंट) का भी इस्तेमाल किया गया है। इसका प्रयोग उन्हीं स्थानों पर किया गया जहां पत्थरों का उपयोग अपरिहार्य कारणों से किया जाना संभव नहीं था। चंडीगढ़ में आर्डर देकर बनवाए गये यह विशेष प्रकार के ईंट सामान्य ईंटो की तुलना में तीन गुना ज्यादा मजबूत है।

रामनवमी पर प्रधानमंत्री ने दिया है रामलला के दर्शन का भरोसा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को राम मंदिर निर्माण से जोड़ा है। उन्होंने वैज्ञानिकों से अपेक्षा की कि वह ऐसी तकनीक विकसित करें जिससे प्रत्येक रामनवमी पर रामलला के प्राकट्य बेला में सूर्य की रश्मियों से रामलला का अभिषेक हो और उनका मुखमंडल इस रश्मियों से आलोकित हो जाय। इसका खुलासा मंगलवार को रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने किया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान निर्माण की तकनीक व प्रयुक्त सामाग्रियों के सैम्पल को डिस्प्ले किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे में इन सबका अवलोकन किया और एलएण्डटी व टाटा के इंजीनियरों व कारीगरों से मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा। कारीगरों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 में रामनवमी के पर्व पर अयोध्या आकर रामलला के दर्शन का भरोसा दिया है।

रामलला के दर्शन अवधि डेढ़ घंटे बढ़ाई गई, देख सकेंगे आरती

अयोध्या। रामलला के दर्शनार्थियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन की अवधि में डेढ़ घंटे की वृद्धि कर दी है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को तीन अलग-अलग समयों में होने वाली आरती के दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अभी तक सायं आरती में यह सुविधा महज तीस श्रद्धालुओं तक सीमित थी। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पहले दर्शन की अवधि सुबह सात से 11 बजे व अपराह्न दो से छह बजे तक थी।

उन्होंने बताया कि सुबह की पाली में आधे घंटे यानी पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे तक होगी। इसी तरह सायं दो से सात बजे तक दर्शन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि 30-30 श्रद्धालुओं को सुबह 6.30 व अपराह्न 12 बजे की आरती में शामिल हो सकते है। इसी तरह सायं 7.30 बजे की आरती में 60 श्रद्धालुओं को अनुमति दी जाएगी। इन श्रद्धालुओं को तीर्थ क्षेत्र कार्यालय से पास निर्गत किया जाएगा।

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