Tuesday, December 6, 2022

384 करोड़ के स्कैम में सात एसडीएम दोषी

गौरीगंज (अमेठी)। लखनऊ-वाराणसी हाईवे (एनएच 56) से जुड़े दो बाईपास के बहाने किए गए 384 करोड़ रुपये के घोटाले में मुसाफिरखाना में एसडीएम रहे कई अफसर बुरी तरह फंस गए हैं। इन अफसरों को जमीन अधिग्रहण में तीन गुना से अधिक मुआवजा बांटने का दोषी पाया गाया है।
जांच टीम ने पाया कि पूरा खेल एनएचएआई के अफसरों की मिलीभगत से खेला गया। मामले में शासन को रिपोर्ट प्रेषित किए जाने के बाद दोषी अफसरों की धड़कन बढ़ गई है।
केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2014 में एनएच-56 के चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। निर्माण से पहले एनएचएआई के अनुरोध पर राजस्व विभाग ने सड़क चौड़ीकरण के अलावा जगदीशपुर व मुसाफिरखाना में कस्बे से बाहर बाईपास का सर्वे किया।
सर्वे के बाद अफसरों ने गलत तरीके से कृषि योग्य भूमि का मुआवजा सर्किल रेट का चार गुना निर्धारित करने के बजाय एनएच से सटी जमीन (इसका सर्किल रेट कई गुना अधिक) के बराबर निर्धारित कर दिया। मुआवजा निर्धारण व वितरण में गड़बड़ी सामने आने के बाद डीएम द्वारा इसकी जांच कराई गई तो 384 करोड़ का घोटाला सामने आया।
डीएम कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार मामले की मॉनीटरिंग सर्वोच्च स्तर से हो रही है। वर्ष 2015 के बाद से मुसाफिरखाना में तैनात रहे सात एसडीएम को गड़बड़ी का दोषी पाया गया है। अधिकारियों ने अपने पदों का दुरुपयोग किया है। जांच रिपोर्ट प्रेषित होने के बाद यह तय माना जा रहा है कि इन अफसरों पर देर-सवेर गाज गिरनी तय है।
मुसाफिरखाना तहसील में दो बाईपास के लिए अवार्ड व मुआवजा वितरण की कार्रवाई एसडीएम आरडी राम के कार्यकाल में शुरू हुई। आरडी राम 23 फरवरी 2015 से 18 सितंबर 2015 तक मुसाफिरखाना के एसडीएम रहे। इसके बाद 19 सितंबर 2015 को अशोक कुमार कनौजिया की तैनाती हुई और वह 25 मार्च 2016 तक एसडीएम रहे।
अशोक कुमार कनौजिया का भी जमीन अवार्ड करने में अहम रोल रहा है। अशोक कुमार कनौजिया के बाद 26 मार्च 2016 से 14 जुलाई 2016 तक सुभाष चंद्र प्रजापति यहां के एसडीएम रहे। 22 जुलाई 2016 से 10 दिसंबर 2016 तक डॉ. वेद प्रकाश मिश्र व 10 दिसंबर 2016 से तीन जुलाई 2018 तक यहां के एसडीएम अभय कुमार पांडेय रहे।
सबसे अधिक राशि का वितरण एसडीएम अभय कुमार पांडेय ने ही किया। चार जुलाई 2018 को देवी दयाल वर्मा की तैनाती की गई। इसके बाद उसी तहसील में तहसीलदार रहे महात्मा सिंह को 23 मार्च 2019 को एसडीएम बनाया गया।
महात्मा 11 मार्च 2020 तक एसडीएम रहे। 2020 में ही मामले के खुलासे के बाद नोटिस जारी हुए थे। इसके बाद अफसरों ने मुआवजा वितरण पर रोक लगा दी थी।
मामले में गर्दन फंसती दिखने पर दोषी अफसरों की छटपटाहट बढ़ गई है। लंबे समय तक मुसाफिरखाना के एसडीएम व इस समय लखनऊ में तैनात अफसर अभय पांडेय बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने डीएम से मिलकर अपनी सफाई दी।
डीएम कार्यालय सूत्रों के अनुसार मामले में फंसते दिख रहे सभी अफसरों के लिए शासन में बैठे बड़े-बड़े अफसर फोन कर रहे हैं। सभी चाहते हैं कि जैसे तैसे उनके करीबी अफसरों को बचा दिया जाए।

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